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Government of India Directorate General Resettlement Department of Ex-Servicemen Welfare (Ministry of Defence)
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डीजीआर के बारे में

पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) एक अंतर-सेवा संगठन है जो सीधे भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (रक्षा मंत्रालय) के तहत कार्य कर रहा है। सशस्त्र बलों में युवा जोश बनाए रखने के लिए, लगभग 60,000 सेवा कार्मिक तुलनात्मक रूप से कम उम्र में हर साल सेवानिवृत्त किए जाते है। सेवानिवृत्ति के समय अधिकांश सेवा कर्मी एक ऐसी उम्र में होते हैं जहां उनके पास कई अधूरी घरेलू जिम्मेदारियां होती हैं, जिनके लिए उन्हें दूसरा व्यवसाय की आवश्यकता होती है। डीजीआर पूर्व सैनिकों को कॉर्पोरेट और उद्योग की आवश्यकता को विकसित करने और पुनर्रोजगार के माध्यम से उनके पुनर्वास को सुविधाजनक बनाने पर जोर देने के साथ अतिरिक्त कौशल को प्रशिक्षित करने और प्राप्त करने में सहायता करता है।

सशस्त्र बलों के कार्मिकों, जिन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कुछ दक्षताओं का अधिग्रहण किया है, को सेवानिवृत्ति/रिलीज के बाद पुनर्रोजगार के लिए अपने कौशल और दृष्टिकोण को फिर से उन्मुख करने की आवश्यकता है। डीजीआर का यह प्रयास है कि सेवा कर्मियों और भूतपूर्व सैनिकों को इस पुनरुत्थान के लिए अवसर प्रदान किए जाएं ताकि दूसरे करियर के लिए एक निर्बाध परिवर्ती को सुविधाजनक बनाया जा सके। डीजीआर ईएसएम

समुदाय की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से पुन: रोजगार / उद्यमिता के लिए अवसर पैदा करने और सपनों को पोषित करने के प्रति प्रतिबद्ध है|

डीजीआर रोजगार संगोष्ठियां: डीजीआर ने ईएसएम को कारपोरेट में नियोजित करने के लिए तीनों सेनाओं के सहयोग से सम्पूर्ण भारत में रोजगार संगोष्ठियों/रोजगार मेलों के आयोजन के लिए सीआईआई और फिक्की के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। ये रोजगार संगोष्ठियां/रोजगार मेले बिना किसी लागत के ईएसएम को उपयुक्त नौकरी ढूंढने के लिए वॉक-इन अवसर प्रदान करते हैं।

इतिहास: विभिन्न मील के पत्थरों का विवरण नीचे संलग्नित किया गया है:-

सितंबर 1919: ब्रिटिश सरकार ने डी.एस.एस.ए एंड बी. के पूर्ववर्ती सेवारत, सेवानिवृत्त और मृत भारतीय सैनिकों के हित को प्रभावित करने वाले मामलों पर सलाह देने के लिए भारतीय सैनिक बोर्ड का गठन किया था।

मार्च 1951: 1947-48 के जम्मू और कश्मीर संक्रिया के बाद बोर्ड का नाम बदलकर भारतीय सैनिकों, नाविकों और एयरमैन बोर्ड कर दिया गया। विकलांग सैनिकों और युद्ध विधवाओं के पुनर्वास के मुद्दों को संबोधित करने के लिए सेना मुख्यालय में एडजुटेंट जनरल की शाखा में छोटे अनुभाग की स्थापना की गई थी।

जनवरी 1968: पुनर्वास महानिदेशालय की स्थापना पूर्व सैनिकों, विधवाओं और आश्रितों के कल्याण और पुनर्वास की जिम्मेदारी के साथ की गई थी।

मई 1975: बोर्ड ने रक्षा मंत्रालय के तहत एक अंतर-सेवा संगठन के रूप में केंद्रीय सैनिक बोर्ड के रूप में फिर से नामित किया।


अप्रैल 1982: केंद्रीय सैनिक बोर्ड के सचिव और सचिवालय के काम पर पर्यवेक्षी भूमिका के साथ-साथ केंद्रीय सैनिक बोर्ड के सचिवालय को पुनर्वास महानिदेशालय के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण के तहत रखा गया।

जनवरी 1991: पुनर्वास महानिदेशालय के तहत परिचालन, सेना के प्रत्येक कमान मुख्यालय में बनाए गए निदेशालय पुनर्वास क्षेत्रों, राज्यों और सक्रिय संरचनाओं के साथ बातचीत करने के लिए, साथ ही ईएसएम मामलों पर जीओसी - इन - सी के सलाहकार भी हो सकते हैं।

सितम्बर 2004: ईएसएम और उनके आश्रितों के कल्याण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए रक्षा मंत्रालय में पूर्व सैनिक कल्याण विभाग का गठन किया गया। 

जनवरी 2009: पुनर्वास महानिदेशालय, केंद्रीय सैनिक बोर्ड और भूतपूर्व सैनिक अंशदायी
स्वास्थ्य योजना पूर्व सैनिक कल्याण विभाग, रक्षा मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय बन गए|

कर्तव्यों का चार्टर : प्रमुख कर्तव्यों का चार्टर निम्नानुसार है: -

सेवानिवृत्त सेवा कर्मिकों के लिए सरकारी/अर्ध-सरकारी/निजी संस्थानों में पुनर्वास प्रशिक्षण का आयोजन करना।

दूसरे रोजगार के रूप में रोजगार/स्व-रोजगार के लिए विभाग की नीतियों/योजनाओं को लागू करना।


पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और कल्याण के सभी मामलों पर संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क स्थापित करना। सेवारत अधिकारियों, सैनिकों, नाविकों और वायुसैनिकों के साथ- 
साथ ईएसएम और उनके आश्रितों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी गई रियायतों और सुविधाओं से पूर्ण लाभ प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करना।

फिक्की और सीआईआई रोजगार के अधिक अवसरों की तलाश के लिए कॉरपोरेट/निजी क्षेत्र और संस्थान के साथ बातचीत करना।

ईएसएम समुदाय में उपलब्ध विशाल अनुशासित और प्रशिक्षित मानव संसाधनों के बारे में जागरूकता पैदा करना।

रोजगार बाजार के रुझानों और उद्योग की अपेक्षाओं पर ईएसएम में जागरूकता पैदा करना ताकि उनके कौशल सेट को बढ़ाया जा सके।

ईएसएम/विधवाओं/सेवारत कार्मिकों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेबसाइट के माध्यम से कल्याण और पुनर्वास के मामलों के संबंध में उपयोगी जानकारी का प्रसार करना।

ईएसएम को विभिन्न विकास गतिविधियों से लाभ उठाने में सक्षम बनाना और यह सुनिश्चित करना कि उन्हें आवश्यक सहायता/ शिकायतों का निवारण प्राप्त हो।

केन्द्र/राज्य सरकार की आरक्षण नीति सहित विभिन्न एजेंसियों द्वारा विभिन्न पुनर्वास और कल्याण स्कीमों के वास्तविक कार्यान्वयन की निगरानी करना।


रोजगार के अवसरों के लिए ईएसएम के नामों का पैनल भारत सरकार के विभागों, संगठनों, कारपोरेट और निजी क्षेत्र के साथ-साथ डीजीआर प्रायोजित रोजगार योजनाओं
को अग्रेषित करना।

ईएसएम के हित और भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के उद्देश्यों का प्रचार और संवर्धन करना।

पुनर्वास/पुनर्रोजगार के लिए सेवानिवृत्त सेवा कर्मियों, आश्रितों और बाह्य समुदाय के बीच अन्तरापृष्ठ के रूप में कार्य करना।

सीआईआई/फिक्की और तीनों सेनाओं के सहयोग से सम्पूर्ण भारत में रोजगार संगोष्ठियां आयोजित करना|

प्रशिक्षण निदेशालय: सेवानिवृत्त होने वाले सेवा कर्मियों, भूतपूर्व सैनिकों और विधवाओं/मृतक कर्मियों के आश्रितों को तैयार करने की जिम्मेदारी डीजीआर को सौंपी गई है ताकि उनकी योग्यता में वृद्धि कर उन्हें दूसरे करियर की तलाश करने में सक्षम बनाया जा सके। नागरिक जीवन में उनके पुनर्वास के लिए प्रशिक्षण डीजीआर के प्रमुख कार्यों में से एक है। प्रशिक्षण कार्यक्रम देश में विभिन्न स्थानों पर सरकारी, अर्ध-सरकारी व प्रतिष्ठित निजी संस्थान के माध्यम से आयोजित किए जाते हैं। पुनर्वास प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल किया गया है जिसमें विकसित होने के मद्देनजर आवश्यक कौशल सेट पर स्पष्ट जोर दिया गया है द्रुत निर्देशन के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम को डीजीआर की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया है| प्रशिक्षण कार्यक्रम तीन श्रेणियों के तहत आयोजित किए जाते हैं: -

अधिकारियों का प्रशिक्षण: सेवा के अंतिम दो वर्षों में सेवारत अधिकारियों के लिए और सेवानिवृत्त/रिहा किए गए अधिकारियों के लिए रिलीज से तीन साल के भीतर या 60 साल तक, जो भी पहले हो। यह प्रशिक्षण आईआईएम, एमडीआई, आईआईएफटी आदि जैसे सर्वोकृष्ट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन के तहत आयोजित किया जाता है। पुनर्वास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सेवारत अधिकारियों को अधिकतम छ: महीने की अवधि तक ड्यूटी पर उपस्थित माना जाता है लेकिन उन्हें किसी भी यात्रा, दैनिक भत्ते का भुगतान नहीं किया जाता है और वे रेलवे वारंट पर यात्रा करने के हकदार नहीं हैं। अधिकारी पाठ्यक्रम शुल्क का 40% का भुगतान करते हैं और 60% शुल्क का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है।

जेसीओ /अन्य रैंकों का प्रशिक्षण: सेवा के आखिरी दो वर्षों में सेवारत जेसीओ/ अन्य रैंक और आईएन / आईएएफ में उनके समकक्ष के लिए। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अस्थायी ड्यूटी के रूप में माना जाता है और वे अपने वेतन और भत्ते को प्राप्त करने के हकदार हैं। 100% पाठ्यक्रम शुल्क का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है।

रोजगार निदेशालय: डीजीआर रोजगार के अवसरों के लिए सेवारत सशस्त्र बलों के श्रेणी I राजपत्रित अधिकारियों और ईएसएम (अधिकारियों) के पंजीकरण के लिए नोडल एजेंसी है। सेवारत कमीशंड अधिकारी डीजीआर योजनाओं के लाभ उठाने के लिए डीजीआर की

वेबसाइट पर स्वयं को ऑनलाइन रूप से पंजीकृत कर सकते हैं। पुन: रोजगार के लिए जेसीओ/अन्य रैंक का पंजीकरण निकटतम जिला सैनिक बोर्डों में किया जाता है। रोजगार निदेशालय भूतपूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के और अधिक अवसर सृजित करने के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र और फिक्की और सीआईआई जैसे संस्थानों के साथ बातचीत करता है। संयुक्त निदेशक, रोजगार के साथ पंजीकृत सभी भूतपूर्व सैनिकों को सिविल क्षेत्र और विभिन्न सरकारी कार्यालयों से प्राप्त अनुरोधों के विरुद्ध प्रायोजित किया जाता है।

स्वरोजगार निदेशालय : स्वरोजगार निदेशालय ईएसएम कोयला लादन और परिवहन कंपनियों के रोजगार और कार्यकरण, विधवाओं और निशक्त ईएसएम के लिए टिप्पर अटैचमेंट, तेल उत्पाद एजेंसियों के आबंटन के लिए पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सीओसीओ स्कीम और सीएनजी के लिए प्रायोजन, सेवानिवृत्त जेसीओ/अन्य रैंक और आईएन/आईएएफ में उनके समकक्ष के लिए मदर डेयरी आउटलेट्स/सफल आउटलेट्स के आबंटन के लिए प्रायोजन के लिए उत्तरदायी है।